शहरी खेती पर बुकलेट शृंखला | Booklet Series on Urban Agriculture

शहरी खेती पर हमें चिंतन और चर्चा करते हुए कई साल हो गए। इतने सालों में तमाम चर्चाओं और अलग-अलग समूहों से बात करके हमने ये जाना कि शहरों में खेती करने वाले तो एक अच्छी तादाद में हैं लेकिन व्यवस्थित तौर से इसकी भूमिका और भविष्य के बारे में सोचते नहीं हैं. छतिया खेती करने वालों में पर्यावरण और शहरी रहन-सहन को लेकर एक सुधरी हुई आलोचनात्मक समझ तो है लेकिन इसको शहरी विकास के व्यापक परिदृश्य में देखने और इसके इर्द-गिर्द सामाजिक बदलाव का कार्यक्रम बनाने को लेकर कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है.

इस अंतर को ख़तम करने के लिहाज से हमने शहरी खेती को ही विषय बनाकर उस पर शोध करने की ठानी. इस सिलसिले में हमने दिल्ली से अपने अध्ययन की शुरुआत की और एक साल के जमीनी अनुभवों के आधार पर एक किताब ‘परिदृश्य से अदृश्य होती खेती’ को प्रकाशित किया. भारत के में शहरी खेती पर केन्द्रित ये अपने तरह की पहली किताब है. इस किताब में दिल्ली के सभी इलाकों में हो रहीं अलग-अलग तरीकों की खेतियों और पेश आ रही चुनौतियों का विस्तार से वर्णन है.

फिर हमें ये लगा कि पूरी किताब को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाना आर्थिक नजरिये से एक मुश्किल काम है. इसलिए हमारी टीम ने शहरी खेती के प्रमुख आयामों को चुनकर उन पर थीम पुस्तिकाएँ बनाना शुरू किया. हमें ये भी ख़याल आ रहे थे कि शहरी खेती के जिन जीवंत रूपों से हम अपने शोध के दौरान रूबरू हुए, उन्हें कैसे सबसे जीवंत तरीके से सबके साथ साझा किया जाए. इस लिहाज से हमने थीम पुस्तिकाओं में ग्राफिक को अधिक जगह दी और पुस्तिकाओं को आकर्षक बनाने के लिए अपने तरफ से पूरी कोशिश की. उम्मीद है कि ये पुस्तिकाएँ शहरी खेती के मुद्दे को आगे बढ़ाने और इसकी तरफ ध्यान लाने में मददगार होंगी. उम्मीद ये भी है कि पढ़ने वालों को ये रुचिकर और महत्त्वपूर्ण लगेंगी और सभी लोग इन जानकारियों को जन-जन तक पहुँचाने में हमारा साथ देंगे.

इन पुस्तिकाओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है. दोनों ही भाषा में पुस्तिकाएँ नीचे दी गयी लिंक पर उपलब्ध हैं.

It’s been many years since our group has been contemplating and discussing the importance of urban farming. Over the years, through many discussions and talking to different groups, we have come to know that there are a good number of cultivators in the cities but we do not systematically think about the role and future of farming in Indian cities. Most rooftop cultivators have an improved critical understanding of the environment and urban living, but have little interest in looking at it in the wider context of urban development and building social change programs around it.

In order to bridge this gap, we decided to do research on urban agriculture. We started our study from Delhi and published a book ‘Paridrishya Se Adrishya Hoti Kheti (literally translated as ‘Cultivation becoming invisible from the landscape’) based on one year of grassroots research and documentation. This is the first book of its kind focused on urban farming in India. In this book, there is a detailed description of the different methods of farming and the challenges being faced in all the areas of Delhi.

But we felt that it is a difficult task from the economic point of view to make the entire book reach more than a few hundred people. So our team selected key dimensions of urban farming and started creating thematic booklets. We were also thinking of how to share the most interesting aspects of urban farming which we had captured in the course of our research. With that consideration, we have given more space to the graphic content in thematic booklets and tried our best to make the booklets attractive for the readers. It is hoped that these booklets will be helpful in taking the agenda of urban agriculture forward. We also anticipate that the readers will find this work interesting and important enough to support us in taking this information to as many people as possible.

These booklets are being made available in both Hindi and English languages. Booklets in both the languages ​​are available at the link given below.

पुस्तिका 1: दिल्ली की शहरी खेती में विविधता: कौन, क्या और किधर (Booklet 1: Diversity in Delhi’s Urban Farming: Who, What and Where)     [हिंदी]    [English]

पुस्तिका 2: दिल्ली का खाना कहाँ से आता है: दिल्ली में शहरी खेती और भोजन तंत्र का रिश्ता (Booklet 2: Where does the food in Delhi come from: Urban agriculture in Delhi and its relationship with the food system)     [हिंदी]    [English]

पुस्तिका 3: यमुना के कछार पर खेती की गतिविधियाँ (Booklet 3: Farming on the floodplains of Yamuna)    [हिंदी]    [English]

पुस्तिका 4: दिल्ली में शहरी खेती की रूह हैं महिलाएँ (Booklet 4: Women are the sould of urban farming in Delhi)   [हिंदी]    [English]

पुस्तिका 5: शहरी खेती में मजदूरों की भूमिका (Booklet 5: The role of laborers in urban farming)    [हिंदी]    [English]

पुस्तिका 6: शहरी खेती में कचरे का सही उपयोग (Booklet 6: Waste management in urban farming)   [हिंदी]    [English]

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