यमुना के कछार पर खेती की गतिविधियाँ

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पल्ला गाँव से दिल्ली को यमुना का साथ मिलता है | पल्ला गाँव से लेकर बुराड़ी तक देहात का इलाका है और पुश्ता के दोनों तरफ खेती होती है | पुश्ता के भीतर की जमीन यानि यमुना खादर में खेती करने वाले लोग खेती की जमीन पर कुछ महीने जहां-तहां झोपड़ियाँ बनाकर रहते हैं ताकि वे अपनी फसलों की ठीक से देखभाल और सुरक्षा कर सकें | यमुना खादर की जमीन जगह-जगह फैली हुई है जहां खेती होती है | जैसे ‘मजनू का टीला’ इलाका, गोल्डन जुबली पार्क के नजदीक, निजामुद्दीन पुल के नजदीक, बाहरी रिंग रोड के पास आदि | ओखला बैराज से आगे मदनपुर खादर और जैतपुर खादर में खेती पर्याप्त मात्रा ,में होती है |  इसके अलावा दिल्ली में यमुना का पश्चिमी और पूर्वी कछार, चिल्ला खादर, मदनपुर खादर, बदरपुर खादर (यमुना पार) पर खेती होती है |

यमुना कछार की खेती दिल्ली की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है क्योंकि दिल्ली के लिए कुल भोजन जरुरत का लगभग 10% हिस्सा शहरी खेती से पूरा होता है और इसमें से साग-सब्जियों का एक अच्छा-ख़ासा हिस्सा यमुना कछार के किसान ही उगाते हैं (इस बारे में अधिक जानकारी इस श्रृंखला की पहली पुस्तिका ‘दिल्ली की शहरी खेती में विविधता: कौन, क्या और किधर’ में प्रस्तुत की गयी है) | यह खेती कछार में रहने वाली किसान-बहुल आबादी के लिए जीविका का एक स्रोत भी है।

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