‘सेंट्रल विस्टा’ पुनर्विकास प्रोजेक्ट: भारतीय गणतंत्र के और सत्ता-केन्द्रित हो जाने का जोखिम

साल 2008 में दुनिया में आई आर्थिक मंदी के केंद्र में थीं चंद वित्तीय बैंक कम्पनियाँ। इनमें से ही एक बड़ी कम्पनी थी मेरिल लिंच। जब एक तरफ भीषण मंदी जारी ही थी तो दूसरी तरफ मेरिल लिंच के सीईओ जॉन थेन अपने ऑफिस की सजावट पर लाखों डॉलर खर्च कर रहे थे। मंदी में...

Seeds of Resistance and Hope

[हिंदी में यहाँ पढ़ें] People’s Resource Centre invites you to a conversation between environmental activists and practitioners of urban farming in India, Lebanon, Syria and Palestine. As the world battles climate and health emergencies, we need to rethink the ways our society and economy is functioning. Self-sufficient cities is not only a slogan but a...

यमुना के कछार पर खेती की गतिविधियाँ

  शहरी खेती पर हमें चिंतन और चर्चा करते हुए कई साल हो गए। इतने सालों में तमाम चर्चाओं और अलग-अलग समूहों से बात करके हमने ये जाना कि शहरों में खेती करने वाले तो एक अच्छी तादाद में हैं लेकिन व्यवस्थित तौर से इसकी भूमिका और भविष्य के बारे में सोचते नहीं हैं. छतिया...

Vikalp Varta on Urban Agriculture

Organised by: Vikalp Sangam Co-organiser: People’s Resource Centre Recording of the session can be watched here:  Vikalp Varta#20 Urban Agriculture Urban Agriculture Today, life in the city is full of comforts and challenges but there is no peace of mind. This restlessness in urban life is pushing people towards urban agriculture in search of relaxation,...

Farming the City 2020 – A People’s Convention on Urban Agriculture

People’s Resource Centre (PRC) and the Institute for Democracy and Sustainability (IDS) organized a week-long webinar series on April 25- May 1, 2020 with the following objectives: To initiate a grassroots-oriented discourse on the role of urban agriculture (UA) in relation with systemic issues including, but not limited to, food security, public health, degrading environment,...

आधुनिक शहर की चुनौतियां और शहरीकरण की नयी अवधारणा

आजकल दिल्ली की जनता धुंध और धुंएं की दहशत से बेहाल और परेशान है । सुप्रीमकोर्ट, हाई कोर्ट, हरित न्यायाधिकरण रोज-रोज सरकारों को तरह-तरह के निर्देश दे रहे हैं और सरकारें फौरी तौर पर खुद को बचने-बचाने के लिए ताबडतोड़ घोषणाएं कर रही हैं । विगत तीन दशकों से साल-दर-साल ऐसे दिन आते हैं और...

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