शहर अपने मल का क्या करे?: भारत, वियतनाम, चीन, इंडोनेशिया और जर्मनी के शहरों में मल उपचार के कुछ अनुभव

[आरोन वॉनसिन्त्यां द्वारा लिखा गया लेख ‘शहरी मछली तालाब’ मूल रूप से ‘लो-टेक मैगज़ीन’ में मार्च 2021 में प्रकाशित हुआ था। इसका हिन्दी में अनुवाद करने और उसे प्रकाशित करने की अनुमति देने के लिए आरोन और ‘लो-टेक मैगज़ीन’ के सम्पादक क्रिस डेकर का धन्यवाद। इस लेख के फ्रेंच और पोलिश भाषाओं में अनुवाद भी पत्रिका की वेबसाइट solar.lowtechmagazine.com पर उपलब्ध हैं।

अंग्रेजी में प्रकाशित मूल लेख Urban Fish Ponds: Low-tech Sewage Treatment for Towns and Cities’ को इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है: https://solar.lowtechmagazine.com/2021/03/urban-fish-ponds-low-tech-sewage-treatment-for-towns-and-cities.html. ये एक रोचक बात है कि ‘लो-टेक मैगज़ीन’ पत्रिका का यह वेब संस्करण पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित सर्वर पर आधारित है और इसे वेबसाइट के इस्तेमाल में खर्च होने वाली ऊर्जा को बुनियादी रूप से कम करने के मकसद से डिज़ाइन किया गया है। इस वेबसाइट की पृष्ठभूमि एक बैटरी मीटर की तरह काम करती है जो उपलब्ध ऊर्जा और उसका उपभोग करने वाले विजिटर ट्रैफ़िक के बीच के संबंध को निरंतर दर्शाता है।]

शहरी मछली तालाब: कस्बों और शहरों के लिए कम तकनीक वाला (लो-टेक) सीवेज उपचार तंत्र

20वीं सदी के मध्य में, पूरे-पूरे शहरों के सीवेज तंत्र मछलियों का सुरक्षित और सफलतापूर्वक उपयोग करके पानी को साफ़ और शुद्ध किया करते थेकचरे को चारे की तरह इस्तेमाल करने वाले मछली-तालाब हमें हमारे अपने मल से निपटने के लिए एक कम तकनीक वाला, सस्ता और टिकाऊ विकल्प देते हैं – साथ ही इस प्रक्रिया में उच्च प्रोटीन वाला भोजन भी देते हैं

खाने-पीने के बाद, हम शौच के लिए जिन शौचालयों में जाते हैं वे हमारे मलमूत्र को नगरपालिका द्वारा संचालित सीवेज तंत्र में प्रवाहित करने के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं। ज़्यादातर ये सीवेज या तो बिना उपचार किये बहा दिया जाता है या इसका उपचार विभिन्न प्रकार के मलजल-उपचार संयंत्रों (सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) में किया जाता है। इनमें से कई बेहद उन्नत ट्रीटमेंट प्लांट को चलाना बहुत महंगा होता है और उनमें काफी ऊर्जा की खपत होती है।[1]

लेकिन सीवेज का उपचार करने के बावजूद, मलमूत्र में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, घुलित ऑक्सीजन, और जैविक पदार्थ का स्तर अधिक होता है जो पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। यह ‘यूट्रोफिकेशन’ नामक प्रक्रिया का कारण बनता है। इन पोषक तत्वों के इतनी अधिक मात्रा में पानी में जाने से शैवाल या काई (algae) पैदा हो जाते हैं, जो बदले में विषैले पदार्थों का उत्पादन कर सकते हैं जिससे बड़े पैमाने पर मछलियों की मृत्यु होती है और नदियों, झीलों और महासागरों में जीवों को नुकसान पहुँचता है[2]

कुल मिलाकर, इस मुद्दे की जड़ यह है कि पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण के बजाय, जैसा कि अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों में होता है, सीवेज उपचार की इस व्यवस्था में सिर्फ एकतरफा प्रवाह है। अगर पानी का बेहतर उपयोग करके या अधिक ऊर्जा-गहन सीवेज उपचार संयंत्रो का उपयोग करके इन समस्याओं का हल भी कर दिया जाते तो समस्या की जड़ ज्यों की त्यों रहती है, यानी कि पोषक चक्र अधूरा ही रहता है। अगर आपके बर्तन में छेद है तो आप उसे उसका पानी बदलकर सही नहीं कर सकते हैं।

[इस प्रकाशन में आगे पढ़ने के लिए ऊपर दिए गए लिंक पर जायें]

[1] उदाहरण के लिए, कई विकसित देशों में सीवेज उपचार में अक्सर पानी के बड़े तालाबों की निरंतर स्वचालित गतिविधि शामिल होती है – एक व्यवस्था जिसे बनाए रखना कठिन होता है और बहुत ज़्यादा ऊर्जा लगती है। जबकि सीवेज  उपचार अमेरिका में राष्ट्रीय ऊर्जा उपयोग का केवल 4% करता है, वे नगरपालिका ऊर्जा उपयोग का 50% उपयोग करता हैं – जो की घरेलू ऊर्जा पदचिह्न का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है । इसका मतलब है कि कस्बे और शहर अगर अलग-अलग उपचार संयंत्रों का उपयोग करते हैं तो उनके ऊर्जा प्रभावों में काफी कमी आ सकती है। देखें: https://betterbuildingssolutioncenter.energy.gov/sites/default/files/ Primer%20on%20energy%20 efficiency%20in%20water%20and%20wastewater%20plants_0.pdf

[2] यह एक छोटी-सी समझी जाने वाली घटना में भी योगदान देता है, जिसे तटीय अंधेरा कहा जाता है, जहां हमारे समुद्र के फर्श कीचड़युक्त और गहरे रंग के हो जाते हैं, जिससे पृथ्वी की सतह का अल्बेडो या परावर्तन कम हो जाता है, जिससे वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ-साथ समुद्री जीवन की दिन के उजाले को प्राप्त करने की क्षमता कम हो जाती है। स्रोत: https://www.hakaimagazine.com/news/the-environmental-threat-youve-never-heard-of/

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