Another City Is Possible: Democratizing urban governance

Another City Is Possible: A Discussion Series Exploring Ideas for New Urbanism

Session 1: Democratising urban governance

People’s Resource Centre invites you to a webinar discussion on why and how to democratise city planning and governance.

We will discuss ideas for a decentralised, participatory and inclusive urban politics, in the context of the 74th constitutional amendment and the global movement for libertarian municipalism. We will look at the current state of municipal institutions in India, whether these institutional arrangements are adequate and what kind of institutions do we need for social ecological transformation of our cities.

Please register at: is.gd/AnotherCityPossible
Date: 04-04-2021
Time: 3-5 PM IST

The panelists will share their knowledge on the subject and their experiences of local and global movements for urban democracy. Presentations will be followed by open discussion to identify the pathways to attain what can be called ‘Nagar Swaraj’- an urban equivalent of Gandhi’s Gram Swaraj.

Panel of Speakers:
Mohan Hirabai Hiralal (Convener, Vrikshamitra)
Varsha Vidya Vilas (Co – Convener, Sadbhavana Trust)
Eleanor Finley (Board member, Institute for Social Ecology)
Raju Bhise (YUVA and Sadbhavana Trust)

Note: This is the first in the series of discussions that PRC plans to organise to explore ideas for a new ecological urbanism and self-reliance. Translation (Hindi-English) and live summary of the discussion will be available during the webinar.

A detailed concept note of the event can be read here.

 

एक अलहदा शहर मुमकिन है: नई शहरियत पर संवाद श्रृंखला

सत्र-1: शहरी शासन को लोकतांत्रिक कैसे बनाया जाए

कृपया यहाँ रजिस्टर करें: is.gd/AnotherCityPossible
दिनांक: 04-04-2021
समय: 3-5 बजे भारतीय समयानुसार

जन संसाधन केंद्र आपको एक वेबिनार चर्चा में आमंत्रित करता है जिसका विषय है- शहर की योजना और शासन को लोकतांत्रिक क्यों और कैसे किया जाए।

हम 74वें संवैधानिक संशोधन और मुक्तिकामी नगरपालिका के वैश्विक आंदोलन के संदर्भ में एक विकेंद्रीकृत, भागीदारी-आधारित और समावेशी शहरी राजनीति के लिए विचारों की चर्चा करेंगे। हम देखेंगे कि भारत में नगरपालिका संस्थानों की दशा क्या है, क्या ये संस्थागत व्यवस्था पर्याप्त है और हमें अपने शहरों के सामाजिक पारिस्थितिक परिवर्तन के लिए किस तरह की संस्थाओं की आवश्यकता है।

पैनल के वक्ता इस विषय पर अपने ज्ञान और शहरी लोकतंत्र के लिए स्थानीय और वैश्विक आंदोलनों के अपने अनुभवों को साझा करेंगे। वक्ताओं की प्रस्तुतियों के बाद खुली चर्चा के जरिये हम गांधी के ग्राम स्वराज के शहरी समकक्ष ‘नगर स्वराज’ की ओर बढ़ने के लिए रास्तों की पहचान की कोशिश करेंगे।

पैनल में वक्ता:
मोहन हीराबाई हीरालाल (संयोजक, वृक्षमित्र)
वर्षा विद्या विलास (सह-संयोजक, सद्भावना ट्रस्ट)
एलेनोर फ़िनले (बोर्ड सदस्य, इंस्टिट्यूट फॉर सोशल इकोलॉजी)
राजू भिसे (‘युवा’ और सद्भावना ट्रस्ट)

नोट: चर्चाओं की श्रृंखला में यह पहला सत्र है। इन चर्चाओं के जरिये जन संसाधन केन्द्र एक नई शहरियत और आत्मनिर्भरता के विचारों को साथ लाने की योजना बना रहा है। भाषाई सुविधा के लिए इस चर्चा के दौरान चर्चा का अनुवाद (हिंदी-अंग्रेजी) और लाइव सारांश उपलब्ध रहेगा।

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